मैं अकेला रह गया

Jan 31, 2017

वो उड़ी, फिर पीछे पीछे, उसके बच्चे उड़ गए,
घोंसले को ताकता, बस मैं अकेला रह गया।
देख तो ली है कलाबाज़ी, तमाशे, खेल सब,
अब भी लगता है यही, दुनिया का मेला रह गया।
जो हवेली थी, कभी उसकी अनोखी शान थी,
चार बँटवारों में, उसका एक ढेला रह गया।

तुम भी तो भारत माँ के बेटे हो

अगर हम जंग करते हैं तो केवल मौत जीतेगी,
अगर तुम जंग करते हो तो तुम भी हार जाओगे,
वही भाषा, वही बोली, वही थाली, वही रोटी,
वही हथियार अमरीकी, भला किस पर चलाओगे,
चलो आओ तलाशें रास्ता जो खो गया हमसे,
भुलाएँ वह भयावह हादसा जो हो गया हमसे,
भले ही नाम बदले हो, भले दहशत समेटे हो,
मगर तुम भी तो मेरी प्यारी भारत माँ के बेटे हो।

देशभक्ति का मौसम


देशभक्ति के मौसम में छींकने के भी अनेक प्रकार होते हैं। भलभला के मुँह बा के छींकने को देशभक्ति नहीं माना जा सकता है। छींक की ध्वनि ऐसी हो मानो किसी ने रिवाल्वर पर साइलेंसर लगा कर गोली दाग़ी हो। मरने वाले को पता भी न चले कि क्या हुआ और उसकी आत्मा महाराज चित्रगुप्त के द्वार पहुँच जाए। वैसे ही आस पास वालों को हवा लगे बग़ैर घुप्प से छींका और ऐसा मुँह बना लिया मानो हम का जानी को छींकिस। जो ग़द्दार जन ज़ोर से छींकते हैं उन्हें छींकने के उपरांत शर्मिंदा होना पड़ सकता है, वहीं देशभक्त छींक मारने वाले लोगों को 'ब्लेस यू' जैसे अमृत वचनों से नवाज़ा जाता है। एक तीसरे प्रकार की छींक भी होती है जिसमें आक्छी की आवाज़ आती है। पहले उसे देशभक्ति का गौरव हासिल था, पर अब मजाल है कि कोई पब्लिक प्लेस में वैसे छींक सके। ऐसे में आपको पुलिस एक बार छोड़ भी दे पर सोशल मीडिया पर विचरने वाले छींक रक्षक आपका छींकना मुश्किल कर देंगे। ये मौसम ऐसा है कि अव्वल तो आप छींकिए ही मत, और यदि छींकना पड़ ही जाए तो भरसक प्रयास कर तयशुदा स्वर ही प्रवाहित करिए। टेगौर ने कहा था कि मानवता राष्ट्र से बड़ी है, आप छींक के स्वर को मानवता के भी ऊपर जानिए तथा सुख से लाईन में खड़े रहिए।

कुछ सामयिक लघु कथाएं


कवच कुण्डल 
और फिर सूर्य देव ने कर्ण से कहा कि, 'हे अंगराज, महा-अभिमानी कर्ण, द्रौपदी का अपमान कर, तुम अधर्म की राह पर कदम बढ़ा चुके हो। मेरे कवच कुण्डल वापस कर दो।' 
कर्ण बोला, 'पितृवर, आपने स्वयं मुझे ये कवच कुण्डल प्रदान किये हैं, मैं इन्हें वापस नहीं कर सकता, यह मुझे अपने प्राणों से भी प्रिय हैं। अंग देश में हुई अनेकानेक सभाओं में मैंने इनका गुणगान किया है। अब तो ये मेरी पहचान का हिस्सा बन चुके हैं। शास्त्रों एवं लोकपाल के अनुसार एक बार दी हुयी वस्तु पर उसके ओरिजिनल मालिक का कोई हक़ नहीं रह जाता है, चाहे कवच कुण्डल हों अथवा वोट। अतः इस विषय में अब आगे कोई चर्चा नहीं होगी।'
सूर्य देव ने निराश होकर वहां से प्रस्थान किया तथा स्वर्ग लोक में इंद्र देव के यहाँ चाय पीने चले गए।

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मंगल पाण्डे अमर रहें!

मिश्रा जी सुबह सुबह मुंह में 'श्याम बहार' (बुद्धिवर्धक चूर्ण एवं सुपारी का कत्थायुक्त आध्यात्मिक समिश्रण) दबाये 'मंगल मंगल हो' गाए पड़े थे। हमने पूछा की दद्दा ये बुधवार के दिन का 'मंगल मंगल' गाय रहे हो। वो बोले कि बबुआ, 'आज पाण्डे दिवस है, जानत नहीं को क्या। आज ऐ के दिन मंगल पाण्डे को फांसी दी गई थी। आज हमें विद्रोह करना है हर शोषण के खिलाफ और हो जाना है पूर्ण रूप से स्वतंत्र। अरे हमरी ही जात के रहे, पक्के बामन, उनकी स्मृति को जीवित रखना है, किसी से दबना नहीं है, कहीं झुकना नहीं है।' इतना कह कर उन्होंने गले में टाई डाली तथा टाई बनाने वाले के परिवार के सभी सदस्यों को ढेर सारे आशीर्वचन देते हुए बोले, 'साली, गले को दबाये रहती है, पर क्या करें नौकरी भी तो करनी है, तनखा काट लेता है मैनेजर। तदुपरांत वे 'मंगल मंगल' गाते हुए अपने काम की ओर कूच कर गए। मंगल पाण्डे अमर रहें!
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कलयुगी शिष्य

और फिर आचार्य ने कौरवों और पांडवों को एक न्यूज़ चैनल के सामने ले जाकर प्रश्न किया?
'सुवीर्यवान, तुम्हें क्या दिख रहा है?'
'मुझे, पार्टी को हराने की कोशिश दिख रही है।'
'विवित्सु, तुम्हें क्या दिख रहा है?'
'मुझे, आँखों में आंसू लिए अपना ईमानदार नेता दिख रहा है।'
'भीमसेन, तुम्हें क्या दिख रहा है?'
'मुझे, वे पिछवाड़े दिख रहे हैं जिन पर लात मारनी है।'
'अर्जुन, तुम्हें क्या दिख रहा है?'
'गुरुवर, मुझे तो मात्र राज्यसभा की कुर्सी दिख रही है?'
'विजयी भव अर्जुन, तुम ही मेरे सच्चे कलयुगी शिष्य हो।'
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सच्चा स्वराज 

विश्वामित्र ने जब दूर से मेनका को आते देखा, तब वे लपक कर तपस्या करने वाले पोज़ में बैठ गए। मेनका आईं तथा उन्होंने विश्वामित्र की तपस्या भंग कर दी। तपस्या भंग करने के बाद मेनका ने प्रश्न किया, 'हे नाथ! ये हमारे द्वारा जो कर्म हुआ है उसका उद्देश्य क्या है?' विश्वामित्र ने अचकचा कर कहा, 'देवी! ये सारा कर्म स्वराज के जन्म के हेतु किया गया है।' उस कालखंड में, समय आने पर स्वराज के स्थान पर शकुंतला का जन्म हुआ। परन्तु समाज में स्वराज लाने के प्रतिबद्ध नेता आज भी मेनकाओं को देख कर समाधि लगा लेते हैं तथा स्वराज लाने को तत्पर रहते हैं।
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राज्य-अभिषेक
जब बाली ने सुग्रीव को अपने नगर से बाहर किया तथा उससे शत्रुता की सार्वजानिक घोषणा करी तब उसके एक सभासद ने यह वचन कहे, 
'महाराज, इस सुग्रीव ने आपके राज्य-अभिषेक में कितना योगदान दिया है, कितनी प्लानिंग करी है, कितनी टी आर पी बढाई है, बहुत सारे लोग तो मात्र इसकी वजह से ही आपको राजा मानते हैं, यदि आप इसको निकाल देते हैं तो आपकी शक्ति का क्षय होगा।' 
यह सुन बाली जोर से कटकटाया और उस सभासद के पीछे ऐसी लात मारी की वह सीधे ऋष्यमूक पर्वत पर जा गिरा। 
तभी टीवी पर ब्रेक हुआ तथा एक 'इस्तेमाल करो और फेंको' (use and throw) उत्पाद के विज्ञापन हेतु सुंदरियाँ अपने जादू बिखेरने लगीं। हमने उठ कर पानी पिया और बरामदे में लटकी 'मैं अन्ना हूँ' लिखी गांधी टोपी पहन कर पुनः रामायण देखने में स्वयं को संलग्न करने लगे।

हास्य दर्शन

Jan 30, 2015



लगभग दस वर्ष पहले (२००५) की बात है, कवि सम्मेलनों हेतु अमेरिका जाने का निमंत्रण आया था। वहां के पंद्रह नगरों में कार्यक्रम होने थे। सोम ठाकुर और उदय प्रताप सिंह जी के संग एक महीने का प्रवास होना था। पिछले वर्ष गोपालदास नीरज जी के साथ सर्वेश अस्थाना जी इन कार्यक्रमों में गए थे अतः हमनें सर्वेश जी को फोन किया तथा उनसे कुछ गुरु मंत्र प्राप्त किये। नीरज जी ने अपना आशीर्वाद देते हुए एक पत्र भेजा जो कि मेरे जीवन की अमूल्य निधियों में से है. सर्वेश जी नें बतलाया कि अपनी सीडी और किताब आदि ले जाना। फिर क्या था इस दिशा में कार्य प्रारम्भ हो गया। डॉ आदित्य शुक्ल, अखिल अग्रवाल और दीप्ति ने सञ्चालन की रूप रेखा तैयार करी, ज़फर मोहिउद्दीन के निर्देश पर रिकॉर्डिंग स्टूडियो बुक किया गया और अंततः कान पर बड़े बड़े कनटोप लगा कर रिकॉर्डिंग पूरी हुयी। कल्पा रमइया नें अपना बनाया चित्र सहर्ष कवर हेतु प्रदान किया तथा वेद प्रकाश पाण्डेय जी के छोटे भाई अजय नें कवर डिज़ाइनिंग की बागडोर संभाली। सीडी का विमोचन राकेश खण्डेलवाल, अनूप भार्गव, सोम ठाकुर तथा उदय प्रताप सिंह के कर कमलों द्वारा अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डी सी में हुआ। यह सीडी मेरी पहली प्रकाशित कृति थी। इसके बाद अनेक पुस्तकें और सीडी आदि प्रकाशित हुयी हैं, पर दिल के जितने निकट ये है उतने निकट कोई दूसरी कृति नहीं पहुँच सकी है।


"हास्य-दर्शन"- कवि अभिनव का जयकारा
पिलखुवा में हुई हास्य दर्शन काव्य संध्या

ॐ नमः शिवाय!

Jul 15, 2014



कलाधर भुवनेश कालकंठ मंगलेश,
भूतनाथ भस्मशायी भद्र को नमन है,
गिरिजापति गिरीश गंगाधर गणनाथ,
शिव शम्भु नटराज उग्र को नमन है,
नीलकंठ भोलेनाथ महाकांत महादेव,
योगेश्वर अंबरीश रुद्र को नमन है,
विषपायी वृषकेतु वैद्यनाथ विश्वनाथ,
अंतक अकंप भालचंद्र को नमन है।

अक्षमाली अभिराम अत्रि अर्धनारीश्वर,
त्रिचक्षु, त्रिधामा, त्रिपुरारि को नमन है,
पशुपतिनाथ पिंगलाक्ष शमशानप्रिय,
शेखर शशांक जटाधारी को नमन है. 
सारंग सतीश साँब कामरिपु सिद्धनाथ,
काशीनाथ नंदी की सवारी को नमन है,
आशुतोष अनिरुद्ध अभदन अरिदम,
इकंग ईशान कष्टहारी को नमन है।

मेरी क्रिसमस

Dec 24, 2012


आज शाम को यूँ ही जाकर खड़ा हो गया अपनी बालकनी पर, 
बारिश बिलकुल वैसे ही हो रही थी जैसे सियैटल में होती है,
नीचे एक लड़की पिज़्ज़ा डिलीवर करने जा रही थी,
कार से नहीं पैदल,
कभी एक हाथ में पिज़्ज़ा का बड़ा थैला पकड़ती,
कभी दूसरे में,
हाथ थक रहा था,
उसनें मुझे देखा तो मैंने इशारे से उसे थैला सर पर रखने को कहा,
उसनें झट वो थैला सर पर रखा,
बिलकुल वैसे जैसे अपने यहाँ मजदूरनियाँ सर पर उठा लेती हैं,
पूरी की पूरी ईमारत की ईटें,  
आगे के मोड़ पर जाकर,
उसनें धन्यवाद में हाथ हिलाया,
और ज़ोर से 'मेरी क्रिसमस' की आवाज़ लगाई.