मधुर मधुर गीतों में रस की फुहारें ज्यों,
ज़िन्दगी के कैनवस पे रंग प्यारे प्यारे ज्यों
सुबह की सैर में हों धूप के इशारे ज्यों,
सतरंगी चूनर पे टंके हों सितारे ज्यों,
तेरे आने से बिटिया मौसम यूँ महका है,
फूलों की बगिया में आई हों बहारें ज्यों.
तू जन्मों से संचित किसी पुण्य के फल सी,
मन के मरुस्थल में बूँद बन के आई है,
जब तुझको देखा तो ऐसी अनुभूति हुयी,
जीवन में रुनझुन है गूंजी शहनाई है,
नवयुग की नव बेला राह देखती तेरी,
तू इसमें जीवन की परिभाषा बन जाना,
प्रकृति का तेज त्याग तप तुझमें वास करे,
तू दृढ संकल्पों की अभिलाषा बन जाना,
तेरा अस्तित्व रहे सदा सूर्य सा दीपित,
तेरा प्रवाह, बहें गंगा के धारे ज्यों,
तेरे आने से बिटिया मौसम यूँ महका है,
फूलों की बगिया में आई हों बहारें ज्यों.
तेरे आने से बिटिया......
Apr 23, 2011प्रेषक: अभिनव @ 4/23/2011 11 प्रतिक्रियाएं
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बाबा विश्वनाथ का त्रिनेत्र खुल जाएगा
Dec 9, 2010भोले भाले लोग गंगा आरती में तल्लीन,
पलकों को मूंदे किये मन में विधाता को,
धूप, दीप, पुष्प, नैवेद्य लिए श्रद्धालु,
दे रहे थे हाथ जोड़े धन्यवाद् माता को,
ठीक उसी क्षण किया असुरों नें उत्पात,
सुरसरी, गंगा मैया रक्त से नहा गयीं,
दुष्ट दानवों की पापमयी ये कुटिल लीला,
एक छोटी बिटिया को संग में बहा गयी,
कौन सी जिहाद, कैसी कौम, कैसा इस्लाम,
तुमको सिखाता भोले मासूमों को मारना,
पहले तो जा के इंसान बन दिखलाओ,
फिर हो सके तो तुम कोई धर्म धारना,
'माय हार्ट गोज़ आउट' शब्दों में बोल कर,
समिति गठित कर आप मत छूटिये,
बांसुरी बजाना छोड़ मेरे मनमोहनजी,
'सत श्री अकाल' बोल दुश्मनों पे टूटिये.
भारत की पुण्य भूमि क्षमाशील है परन्तु,
शिशुपाल का हर एक पाप तुल जाएगा,
दोज़ख में भी न छिप कर रह पाओगे जो,
बाबा विश्वनाथ का त्रिनेत्र खुल जाएगा.
प्रेषक: अभिनव @ 12/09/2010 1 प्रतिक्रियाएं
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ज़िन्दगी, तू मुझे सताना छोड़ दे
Oct 12, 2010प्रेषक: अभिनव @ 10/12/2010 3 प्रतिक्रियाएं
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डॉ उर्मिलेश की सुप्रसिद्ध कविता - वन्दे मातरम
Sep 27, 2010प्रेषक: अभिनव @ 9/27/2010 4 प्रतिक्रियाएं
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एक छंद
Sep 4, 2010प्रेषक: अभिनव @ 9/04/2010 7 प्रतिक्रियाएं
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माखन चोर - डॉ बृजेन्द्र अवस्थी (जन्माष्टमी की अनेक शुभकामनाएं)
Sep 2, 2010प्रेषक: अभिनव @ 9/02/2010 1 प्रतिक्रियाएं