निनाद गाथा

अलार्म बज बज कर, सुबह को बुलाने का प्रयत्न कर रहा है, बाहर बर्फ बरस रही है, दो मार्ग हैं, या तो मुँह ढक कर सो जाएँ, या फिर उठें, गूँजें और 'निनाद' हो जाएँ।

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Name: अभिनव
Location: सिएटल, वाशिंगटन, United States

Monday, December 03, 2007

नीरज त्रिपाठी नें सुनाईं सहज हास्य की बढ़िया कविताएं

इस शनिवार सिएटल में हैदराबाद से पधारे कवि नीरज त्रिपाठी के सम्मान में कवि गोष्ठी का आयोजन हुआ. शनिवार को खूब बर्फ भी पड़ी तो एक बार तो लगा की शायद कार्यक्रम न हो पाये पर अंततः कुछ काव्य प्रेमी जुट ही गए और बढ़िया काव्य धारा बही. ये देखिये कुछ चित्र.



यहाँ गोष्ठी वाले दिन खूब बर्फ पड़ी, हम लोग फोटो खिचाने बाहर आए, ज़रा संभाल कर कही फिसल जाएँ


राहुल उपाध्याय, अभिनव शुक्ल, नीरज त्रिपाठी तथा जेरेड शोक्ले


कविता सुनते समय श्रोताओं के साथ ठहाका लगाते हुए कवि नीरज त्रिपाठी



भोलू वाली कविता सुनते हुए कवि नीरज त्रिपाठी


कविता सुन कर मुस्कुराते हुए कवि नीरज त्रिपाठी


कवि गोष्ठी के बाद का एक चित्र



एक और समूह चित्र

अभिनव शुक्ल, नीरज त्रिपाठी तथा जेरेड शोक्ले

1 Comments:

Blogger डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल said...

अभिनव जी, चित्र देखकर अच्छा लगा. अगर कुछ कविताएं, या कम से कम कुछ काव्यांश भी दे देते तो और भी अच्छा रहता. चलिए, अब ही

10:11 AM  

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