निनाद गाथा

अलार्म बज बज कर, सुबह को बुलाने का प्रयत्न कर रहा है, बाहर बर्फ बरस रही है, दो मार्ग हैं, या तो मुँह ढक कर सो जाएँ, या फिर उठें, गूँजें और 'निनाद' हो जाएँ।

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Name: अभिनव
Location: सिएटल, वाशिंगटन, United States

Thursday, April 19, 2007

साथ ऐसे रहें, जैसे परिवार हों

हम गुनहगार हों, चाहे बीमार हों,
चाहे लाचार हों, चाहे बेकार हों,
जो भी हों चाहे, जैसे भी हों दोस्तों,
साथ ऐसे रहें, जैसे परिवार हों,

कुछ नियम से बहे स्वस्थ आलोचना,
हो दिशा सूर्योन्मुख सकारात्मक,
व्यर्थ में जो करे बात विघटनमुखी,
उससे क्या तर्क हों, आर हों, पार हों,

हम पढें, हम लिखें, सबसे ऊँचा दिखें,
ज़ोर पूरा लगाकर, वहीं पर टिकें,
उसपे ये शर्त रखी है सरकार नें,
फैसले सब यहीं बीच मंझधार हों,

ये भरोसा है हमको जड़ों पर अभी,
हमको आंधी से ख़तरा नहीं है मगर,
ये ज़रूरी है सबके लिए जानना,
कब रहें बेखबर, कब ख़बरदार हों,

शब्द हल्के रहें, चाहे भारी रहें,
भावनाओं के संचार जारी रहें,
अच्छे शायर बनें न बनें दोस्तों,
अच्छा इंसान बनने का आधार हों,

Thursday, April 05, 2007

भाई, जुर्म यहाँ कम है

जो कह रहे हैं,
"भाई, जुर्म यहाँ कम है",
सचमुच,
उनकी एक्टिंग में बड़ा दम है,
यहाँ मुझे लग रहा है,
साढ़े पाँच बज गए हैं,
रात,
धीरे धीरे,
अपनी चादर फैलाएगी,
ट्यूशन छूटने में एक घंटा बाकी है,
मेरी बेटी,
घर वापस कैसे आएगी।