कहाँ से आया है पत्थर हमें नहीं मालूम,
सभी मीनारें हमें एक जैसी लगती हैं,
कहाँ निशान लगाएँ ज़रा बताओ हमें,
सभी दीवारें हमें एक जैसी लगती हैं।
गाछ और पेड़
20 hours ago
अलार्म बज बज कर, सुबह को बुलाने का प्रयत्न कर रहा है, बाहर बर्फ बरस रही है, दो मार्ग हैं, या तो मुँह ढक कर सो जाएँ, या फिर उठें, गूँजें और 'निनाद' हो जाएँ।
कहाँ से आया है पत्थर हमें नहीं मालूम,
सभी मीनारें हमें एक जैसी लगती हैं,
कहाँ निशान लगाएँ ज़रा बताओ हमें,
सभी दीवारें हमें एक जैसी लगती हैं।
प्रेषक: अभिनव @ 3/31/2007 3 प्रतिक्रियाएं
वक्त की झील में तस्वीर बना देती है,
दर्द दे दे के उम्मीदों की दुआ देती है,
कभी आंखों में सजाती है सुनहरे सपने,
कभी ख्वाबों के चिरागों को बुझा देती है,
दिन उगेगा तो ये सूरज की बाँह थामेगी,
अंधेरी रात में दीपक को जला देती है,
हर सबक कैद नहीं होता है किताबों में,
ज़िन्दगी भी बहुत से दाँव सिखा देती है।
प्रेषक: अभिनव @ 3/27/2007 4 प्रतिक्रियाएं
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